|| या देवी सर्वभूतेषु मातारुपेन संस्थिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम|| धन मंत्र:- “दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥” आकर्षण मंत्र:- || ॐ क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा, बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति || प्रथम देवी माता शैलपुत्री देवी | द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी | तृतीय रूप चंद्रघंटा | चतुर्थ कूष्मांडा | पंचम रूप स्कंदमाता | षष्ठम् रूप कात्यायनी | सातवां रूप कालरात्रि | अष्टम रूप महागौरी | नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री

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